छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए मंत्रिमंडल ने हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना-2025 को दी मंजूरी
योजना से 2 लाख से अधिक करदाताओं को मिलेगा लाभ
चंडीगढ़, 23 जनवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाने और राज्य में व्यापार के अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। संकल्प पत्र में किए गए वादे को पूरा करते हुए सरकार ने कर बकाया राशि की वसूली के लिए ‘हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना 2025‘ शुरू की है, जिसका उद्देश्य जीएसटी व्यवस्था से पहले के अधिनियमों के तहत मुकदमेबाजी के बोझ को कम करना, बकाया राशि की वसूली में तेजी लाना और छोटे करदाताओं को राहत देना है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘हरियाणा एकमुश्त निपटान योजना 2025‘को मंजूरी दी गई।
योजना से 2 लाख से अधिक करदाताओं को मिलेगा लाभ
जीएसटी से पहले के सात अधिनियमों के तहत बकाया कर देनदारियों के निपटान के लिए तैयार की गई नई योजना में, किसी एक अधिनियम के तहत 10 लाख रुपये तक की बकाया देनदारियों वाले करदाताओं को 1 लाख रुपये तक की रियायत दी जाएगी। साथ ही, शेष मूल कर राशि का 60 प्रतिशत भी माफ किया जाएगा।
इसके अलावा, 10 लाख रुपये से अधिक और 10 करोड़ रुपये तक की बकाया देनदारियों वाले करदाताओं को भी उनकी कर राशि पर 50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। इस योजना से 2 लाख से अधिक करदाताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेष रूप से, इस योजना का लाभ उठाने वाले सभी करदाताओं की ब्याज और जुर्माना राशि पूरी तरह से माफ कर दी जाएगी। 10 लाख रुपये से अधिक की निपटान राशि वाले करदाताओं को अपनी मूल राशि दो किस्तों में चुकाने की अनुमति होगी।
यह योजना सात अधिनियमों के तहत परिमाणित बकाया राशि के लिए लागू है, अर्थात् हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 (2003 का 6), केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 (1956 का केंद्रीय अधिनियम 74), हरियाणा स्थानीय क्षेत्र विकास कर अधिनियम, 2000 (2000 का 13), स्थानीय क्षेत्रों में वस्तुओं के प्रवेश पर हरियाणा कर अधिनियम, 2008 (2008 का 8), हरियाणा विलासिता कर अधिनियम, 2007 (2007 का 23), पंजाब मनोरंजन शुल्क अधिनियम, 1955 (पंजाब अधिनियम 16, 1955), हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 (1973 का 20)।
योजना की मुख्य विशेषताएं
यह एक सरलीकृत योजना है। पुरानी योजना के विपरीत इसमें कर का कोई वर्गीकरण नहीं है; जैसे स्वीकृत कर, विवादित कर, निर्विवाद कर या अंतर कर। इसके अलावा, नई योजना में ब्याज और सभी प्रकार के दंड माफ किए गए हैं।
जिन छोटे करदाताओं का संचयी परिमाणित कर बकाया 10 लाख रूपये तक है, उन्हें अपने संचयी कर बकाया में से 1 लाख रुपये का कर काटने के बाद केवल 40 प्रतिशत का भुगतान करना होगा, और अन्य जिनका संचयी बकाया 10 करोड़ रुपये तक है, उन्हें संचयी कर बकाया का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।
यह योजना नियत दिन से 120 दिनों के लिए खुली रहेगी। जिस करदाता की निपटान राशि 10 लाख रुपये से अधिक आती है, वह निपटान राशि दो किस्तों में दे सकता है।
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