करोड़ों की गाड़ियों की कीमत लाखों दिखाकर हिमाचल में हुआ फर्जीबाड़ा, पालमपुर के साथ नूरपुर और इंदौरा में भी हुआ रजिस्ट्रेशन
शिमला. कोरोना संकट काल में देवभूमि हिमाचल में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर करोड़ों का फर्जीबाड़ा हुआ है। जिसका खुलासा होने के बाद अब फर्जी तरीके से रजिस्टर्ड हुई गाड़ियों को जब्त भी किया जा रहा है। सबसे पहले यह मामला पालमपुर में सामने आया, जहां पर करोड़ों की गाड़ियों के फर्जी डाक्यूमेंट तैयार कर कम कीमत दिखाकर टैक्स की चोरी की गई। जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का टैक्स के रुप में चूना लगा। जानकारी के अनुसार 2 से 3 करोड़ कीमत की गाड़ियों की कीमत 20 से 50 लाख दिखाकर रजिस्ट्रेशन कराया गया। पालमपुर के एसडीएम बताते हैं कि दिसंबर माह में पहला मामला सामने आया। जिसके बाद सभी करीब 3400 रजिस्टर्ड गाड़ियों की जांच की गई जिसमें 109 गाड़ियां फर्जी डाक्यूमेंट के आधार पर रजिस्टर्ड पाई गईं। सभी का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया गया है और अभी तक 6 गाड़ियों को जब्त किया गया है। एसडीएम के अनुसार पूरे मामले की एफआईआर दर्ज की गई और जांच में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। लेकिन अब पालमपुर के बाद कांगड़ा जिले के नूरपुर और इंदौरा में भी फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले सामने आए हैं। जिससे लगता है कि गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में फर्जीबाड़े का यह खेल पूरे प्रदेश में खेला गया है। कांगड़ा जिला परिवहन मंत्री विक्रम ठाकुर का गृह जिला है और उन्हीं के जिले में इतना बड़ा फर्जीबाड़ा होना, कई सवाल खड़े करता है। पालमपुर में रजिस्टर्ड हुईं गाड़ियों में बहुत महंगे ब्रांड की गाड़ियां ही शामिल हैं जिसमें फरारी, रेंज रोवर, मर्सीडीज, जगुआर और ऑडी जैसे महंगे ब्रांड के गाड़ियां हैं। इन सब गाड़ियों की कीमत करोड़ों में आंकी जा सकती है। इस फर्जीबाड़े के मामले में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कोरोना काल में सरकारी तंत्र में बड़े भ्रष्टाचार हुए हैं। जब जनता कोरोना महामारी से परेशान है ऐसे में सरकारी तंत्र में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया में दर्जनों महंगी गाड़ियों की फोटो पोस्ट कर सरकार से जवाब मांगा है कि वह बताएं कि गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में हुए करोड़ों की टैक्स चोरी और भ्रष्टाचार का जिम्मेदार आखिर कौन हैं। अग्निहोत्री के अनुसार प्रदेश में लगभग 5 हजार से अधिक महंगी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन का फर्जीबाड़ा होने का अनुमान है। जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का टैक्स की चोरी हुई है। अभी तो पालमपुर के बाद नूरपुर और इंदौरा में ऐसे मामले आए हैं। प्रदेश के सभी सबडिविजन में जब जांच होगी तो सच्चाई सामने आएगी।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की फीस 3 फीसदी होती थी, जबकि अन्य प्रदेशों में करीब 9 फीसदी होती थी। जिससे टैक्स बचाने के लिए लोगों ने हिमाचल प्रदेश में गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए सक्रिय हुए। यहां तो करोड़ों की गाड़ियों की कीमत लाखों रुपए दिखाते हुए फर्जी डाक्यूमेंट तैयार किए और बहुत ही कम टैक्स देकर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया। अब देखना है कि पूरे प्रदेश में जांच होती है कि ऐसे कितने मामले सामने आते हैं। मुकेश अग्निहोत्री का आरोप है कि फर्जी कागजात के आधार पर महंगी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में हुए करोड़ों के फर्जीबाड़े में बड़े लोग शामिल है। यह पूरा खेल सत्ता के संरक्षण में चलता दिखाई देता है। जिससे सरकार को यह बताना चाहिए कि इस फर्जीबाड़े का जिम्मेदार कौन है।
HP SET ECONOMICS PAPER 2, 2015
कोरोना वैक्सिनेशन महाअभियान : जागरूकता रथ के माध्यम से लोगों को किया जा रहा है जागरूक
मुख्यमंत्री ने द्रंग विधानसभा क्षेत्र के लिए कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की
CM reviews Covid and drought situation in Una District
मुख्यमंत्री ने पुलिस कर्मियों को रक्तचाप माॅनिटर भेंट किए
Chief Minister inaugurates and lay foundation stones worth Rs. 32 crore
BJP should tell whether it supports State’s RDG plan: CM
भाजपा नेता राजेंद्र राणा में सीएम ऑफिस में सलाहकारों, ओएसडी और रिटायरियों की भर्ती पर उठाए सवाल
BJP leaders in dilemma, failed to clarify stand on RDG: Chief Minister