शिमला. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने पूरे देश को संकट में डाल दिया है। बहुत तेजी से फैल रहे संक्रमण के कारण देश में एक दिन में 2 लाख से अधिक केस आ रहे हैं। जिससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित कई प्रदेशों में स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट आ गया है। हिमाचल प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में नजर आ रही है। हिमाचल में अभी लगभग 1 हजार केस प्रतिदिन आ रहे हैं। कोरोना पॉजेटिव आने वालों का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण को लेकर केंद्र सरकार ने प्रदेश की स्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार प्रदेश को ही दे दिया है। जिससे हर प्रदेश के मुख्यमंत्री हालात के अनुसार बंदिशें लगाने का निर्णय लें। हिमाचल सरकार ने कोरोना संक्रमण से निबटने के लिए अभी तक कोई सख्त निर्णय नहीं लिया है। अभी तक सरकार के रुख से यह तय माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सरकार पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाने वाली है, लेकिन सरकार को जरुरी बंदिशें तो लगानी ही होगी। प्रदेश में तेजी से फैलते संक्रमण के कारण प्रदेश का आम आदमी चिंतित है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का दाबा तो कर रही है लेकिन सच्चाई सामने हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं किस हाल में हैं। देश की राजधानी दिल्ली और मुंबई के यह हाल है कि वहां न तो कोरोना संक्रमित को अस्पताल में जगह मिल रही है और ऑक्सीजन की कमी से मौत होने के समाचार आ रहे हैं। इस कारण सरकार को संक्रमण को रोकने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने की जरुरत है। हिमाचल में कोरोना संक्रमण के फैलने का सबसे अधिक खतरा बाहरी प्रदेशों से आने वाले लोगों से ही है। सरकार को चाहिए कि प्रदेश में प्रवेश करने वालों को लिए बिना देरी किए सख्त नियम लागू करे। कम से कम यह तो होना ही चाहिए कि हिमाचल में उसी को प्रवेश मिलेगा, जिसके पास कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट हो। जिससे यह तो होगा कि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति प्रवेश नहीं कर पाएगा। सरकार को बसों में सफर करने, सरकार कार्यालय में आधा कर्मचारियों को आने, फाइव डे वीक करने के साथ सख्ती के साथ सोशल डिस्टेंशिंग बनाए रखने और मास्क पहनने की नियम लागू करना चाहिए। जिससे कि हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जाए और लोगों की जान बचाई जा सके।
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