विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मुख्य प्रवक्ता एवं भाजपा विधायक राकेश जमवाल ने पंचायती राज संस्थाओं व स्थानीय निकायों के चुनावों को टालने के कांग्रेस सरकार के लगातार प्रयासों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सदन के भीतर अपना विस्तृत वक्तव्य रखते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार की नियत शुरू से ही साफ नहीं है और वह लोकतंत्र की आत्मा—चुनाव—का गला घोंटने पर तुली हुई है।
जमवाल ने कहा कि जब सरकार को पहले से पता था कि पंचायतों व निकायों का कार्यकाल दिसंबर–जनवरी में समाप्त हो रहा है, तो समय रहते री-ऑर्गेनाइजेशन का कार्य क्यों नहीं किया गया? आज जब चुनाव सिर पर हैं, तब नए-नए बहाने बनाकर चुनावों से भागा जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “सरकार के मंत्री कुछ कहते हैं, मुख्यमंत्री कुछ और कहते हैं… तालमेल का पूर्ण अभाव है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री लगातार आपदा का बहाना बनाकर चुनावों को टालना चाहते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि आपदा प्रबंधन और सड़क बहाली में सरकार की कोई प्रभावी मशीनरी दिख ही नहीं रही। उन्होंने कहा कि सड़कों के बहाल होने की बात करके चुनाव टालने की कोशिश हो रही है, जबकि गांवों में सड़कें अब तक बंद पड़ी हैं और सरकार कागज़ों में ‘आपदा’ का बहाना ढूंढ रही है।
जमवाल ने बिहार चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस पूरे देश में जनता का विश्वास खो चुकी है। 243 सीटों में केवल 6 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी को जनता का फैसला अच्छी तरह पता है। यही डर हिमाचल में भी उन्हें सता रहा है, इसलिए पंचायतों और निकायों के चुनावों से भाग रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नए नगर पंचायतों, नगर परिषदों व निगमों को बनाने की नोटिफिकेशन सरकार ने जल्दबाज़ी में कर दी, लेकिन अब स्वयं संशोधन लाकर चुनाव एक साल आगे बढ़ाने की बात कर रही है। “अगर नए संस्थान बिना व्यवस्था के तुरंत नोटिफाई हो सकते हैं, तो चुनाव समय पर क्यों नहीं?”
जमवाल ने राज्यपाल द्वारा व्यक्त किए गए मत का ज़िक्र करते हुए कहा कि महामहिम राज्यपाल ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि चुनाव नहीं होंगे तो विकास रुक जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायतों के माध्यम से ही ग्रामीण क्षेत्रों में विधायक निधि, एसडीपी व बैकवर्ड एरिया सब-प्लान जैसी समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन होता है, लेकिन सरकार इन संस्थाओं को ठप कर लोकतंत्र को पंगु बनाने की कोशिश कर रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमिशन ने अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं, चुनाव सामग्री ज़िलों को भेजी जा चुकी है और अब केवल सरकार की हरी झंडी का इंतज़ार है।“चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं—और कांग्रेस सरकार इस आत्मा का गला घोंटने पर तुली हुई है।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि पंचायती राज संस्थाओं व स्थानीय निकायों के चुनाव तुरंत कराए जाएं, ताकि विकास और लोकतंत्र की प्रक्रिया बाधित न हो।
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