अलविदा : जन नायक
जननायक, गरीबों के मसीहा, जनता के दिलों के राजा, फाइटर, राजा नहीं फीकर है, हिमाचल की तकदीक है, आधुनिक हिमाचल के निर्माता सहित अनगिनत उपाधियों के धारणकर्ता बुशहर रियासत के राजा और हिमाचल प्रदेश के 6 बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह को देश-प्रदेश के लाखों लोगों ने नम आंखों के साथ अलविदा कहा। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था ही बन गए, जिनके निधन का समाचार सुनकर प्रदेश के लाखों लोग तो ‘निशब्द’ हो गए। उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरे देश से लोग आए, जिनसे उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। शिमला से रामपुर तक की अंतिम यात्रा में अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लाखों लोगों की आंखों के आंसू थम ही नहीं रहे थे। उनके बेटे विक्रमादित्य अपने पिता के प्रति लोगों के उमड़ते प्रेम के कारण पल –पल में रोने लगते। यह लोगों ने देखा नहीं जा रहा था। रामपुर में अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा हजारों लोगों का सैलाब, बताता है कि वाकई में वीरभद्र सिंह लोगों के दिलों के राजा थे। रामपुर बुशहर की रियासती परंपरा के अनुसार पुत्र विक्रमादित्य का राज्याभिषेक हुआ और फिर राजा साब अंतिम यात्रा पर निकल पड़े। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बारे में जितना लिखा जाए, उतना कम ही रहेगा।
13 वर्ष में उम्र में संभाली राजगद्दी
13 वर्ष की आयु में बुशहर रियासत की राजगद्दी संभालने वाले पहले राजा वीरभद्र सिंह थे। बुशहर रियासत के राजा पदमदेव सिंह के निधन के बाद वर्ष 1947 में वीरभद्र सिंह ने राजगद्दी संभाली थी। आजाद भारत में राजशाही प्रथा समाप्त होने के बाद भी राजगद्दी संभालने के साथ-साथ वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश की कमान छह बार बतौर मुख्यमंत्री कमान संभाली। कृष्ण वंश के राजा वीरभद्र सिंह ने प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में काफी बड़ी भूमिका अदा की। बुशहर रियासत की शान वीरभद्र सिंह का जन्म 1934 में शोणितपुर जिसे वर्तमान समय में सराहन के नाम से जाना जाता है में हुआ था।
वीरभद्र सिंह का विवाह दो बार हुआ। 20 साल की उम्र में जुब्बल की राजकुमारी रतन कुमारी से उनकी पहली शादी हुई। लेकिन कुछ वर्षों बाद ही रतन कुमारी का देहांत हो गया। इसके बाद 1985 में उन्होंने प्रतिभा सिंह से शादी की। प्रतिभा सिंह भी मंडी से सांसद रह चुकी हैं। वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में शिमला ग्रामीण से विधायक हैं।
राजनैतिक सफर : 6 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे
हिमाचल में सबसे अधिक छह बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड वीरभद्र सिंह के नाम दर्ज है। 1983 से 1985 पहली बार, फिर 1985 से 1990 तक दूसरी बार, 1993 से 1998 में तीसरी बार, 1998 में कुछ दिन चौथी बार, फिर 2003 से 2007 पांचवीं बार और 2012 से 2017 छठी बार मुख्यमंत्री बने।
वीरभद्र सिंह ने पहली बार महासू लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। लोकसभा के लिए वीरभद्र सिंह 1962, 1967, 1971, 1980 और 2009 में चुने गए। वर्तमान में वीरभद्र सिंह अर्की से विधायक थे। इंदिरा गांधी की सरकार में वीरभद्र सिंह दिसंबर 1976 से 1977 तक केंद्रीय पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे।
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