प्राकृतिक खेती और मानव स्वास्थ्य
आज के दौर में किसान-बागवान अधिक उत्पादन और अधिक लाभ के मोह में अपने खेत-बागीचों में रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहा है। इससे पोषण युक्त खाद्यान मिल पाना एक स्वप्न मात्र प्रतीत हो रहा है। ऐसे समय में किसानों की आर्थिकी पर किसी प्रकार का असर न पड़े और उपभोक्ताओं को रसायनमुक्त, पोषणयुक्त खाद्यान मिल सके, इसके लिए हिमाचल सरकार की ओर से अनूठी पहल की गई है। हिमाचल सरकार की ओर से तीन साल पहले शुरू की गई प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। हिमाचल की आर्थिकी में कृषि बागवानी एवं इससे सम्बद्ध क्षेत्र प्रदेश की सकल घरेलू आय में 13.46 प्रतिशत का योगदान एवं 69 प्रतिशत जनसंख्या को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में प्रचलित वैज्ञानिक खेती आधारित उच्च मूल्य एवं एक फसल प्रणाली में किसान-बागवान को व्यापक स्तर पर असंतुलित रसायनिक खादों एवं अन्य कीट-फफूंद-खरपतवार नाशकों के प्रयोग के लिए ना केवल प्रोत्साहित किया है, अपितु इन पर खेती निर्भरता शत प्रतिशत कर दी है। परिणामस्वरूप भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने लगी तथा पानी का भूमि में रिसाव बंद हो गया। हर वर्ष नए कीट-पतंगों एवं बीमारियों के उद्भव ने फसल उत्पादकता में ठहराव तो ला दिया है, साथ में साल दर साल इसमें कमी भी आने लग गई है। किसान-बागवान पूरी तरह से फसल-फल उत्पादन हेतु बाजार पर निर्भर हो गया है। उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई और उत्पादन घटने लगा है। इस स्थिति में किसान खेती-बागवानी करने के लिए बैंक ऋण की ओर आकर्षित होने लगा । जिसका भयावह परिणाम हम देशभर में पिछले 10 वर्षों में लगभग 3 लाख मेहनतकश किसानों को गवां कर देख चुके हैं।
देश के अन्य भागों की तुलना में पहाड़ी प्रदेश में पशुधन की कमी आ रही है। औसतन परिवार से पशु कम हो गए या दुधारू पशु टीकाकरण की समस्या या बांझपन के कारण तथा बैलों की खेती में अनुपयोगिता के कारण उन्हें सड़कों पर आवारा छोड़ दिया गया है। कृषि क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में यह आज एक गंभीर मुद्दा है। इस कारण गोबर एवं अन्य कूड़ा खादों की फल उत्पादन के लिए अनुमोदन मात्रा अनुरूप मात्रा की अनुपलब्धता भी एक अन्य कारण दिन प्रतिदिन बनता जा रहा है।
फसल फल उत्पादन प्रदेश के वर्तमान परिदृश्य में अधिकतम दहलीज पर पहुंच चुका है। देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 2022 तक किसान-बागवान की आय को दोगुना करने का आह्वान, कृषि नीति निर्धारकों, कृषि वैज्ञानिकों एवं प्रसार अधिकारियों के लिए एक गंभीर चुनौती है। अतः अब आवश्यकता है एक ऐसे खेती मॉडल की, जिसमें कम से कम स्थानीय खेती संसाधनों के प्रयोग से अधिकतम फसल उत्पादन हो। ऐसा खेती प्रारूप जो किसान को बाजार आधारित, फसल उत्पादन आदानों से मुक्त करे तथा रसायन रहित उत्पाद पैदा कर वह अपनी आय बढ़ाऐं। फसल उत्पादन का मूल्य न्यूनतम तथा फसल उत्पादन अधिकतम के अनुपात में हो, यह ही एक रास्ता है। जिससे हम निश्चित अवधि में किसान की आय को दोगुना कर सकते हैं। इसी से छोटे किसानों की खेती क्षमताएं सुदृढ़ होंगी। किसान की अल्प एवं दीर्घावधि की खुशहाली एवं आय वृद्धि हेतु हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान’ नामक एक महत्वकांशी योजना का क्रियान्वयन ’प्राकृतिक खेती’ की संकल्पना द्वारा किया है। इस संकल्पना के शिल्पी महाराष्ट्र के कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री सुभाष पालेकर हैं। देशभर के लगभग 50 लाख किसान इस ’सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती’ से जुड़ चुके हैं। इस खेती विधि से फल फसलों को उगाने में किसी भी प्रकार के रसायनिक खादों, कीट नाशकों, फफूंद नाशकों इत्यादि के प्रयोग किए बिना सफल खेती कर किसान जहर-मुक्त खाद्यान तथा फल-सब्जियों का उत्पादन करता है। आज खादों एवं अन्य रासायनों के अंधाधुंध प्रयोग से किसानों की साख आम-उपभोक्ता बाजार में घटी है। स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील उपभोक्ताओं में यद्यपि सामान्य खाद्यान के अतिरिक्त फल सब्जियों की मांग बढ़ी है लेकिन इनके रासायन दूषित होने के संदेह के कारण वह भयभीत हैं। ’पीजीआई’ चंडीगढ़ एवं ’ब्लूमबर्ग जन स्वास्थ्य स्कूल’ अमेरिका के एक संयुक्त अनुसंधान में पंजाब के कपास बहुल खेती वाले ग्रामीण इलाकों के 23 प्रतिशत किसानों के खून एवं पेशाब में विभिन्न कीटनाशकों के अंश मिले हैं। इसका डिप्रेशन, उच्च रक्तचाप, घबराहट, थकान, अनिद्रा, बेहोशी इत्यादि खतरनाक बीमारियों से सीधा सम्बन्ध है।
इस परिस्थिति में आम उपभोक्ता अब रसायन मुक्त फल-सब्जी बाजार की राह जोत रहा है। जैविक कृषि उत्पाद से एक आशा जगी थी लेकिन इसमें भी बाहरी आदानों के जुड़ने से यह खेती भी किसानों से दूर होती गई। वर्तमान परिस्थिति में ’जैविक खेती’ की लागत ’रासायनिक खेती’ से भी बढ़ गई है। पद्मश्री श्री सुभाष पालेकर के अनुसार वर्मी कंपोस्ट बनाने वाला केंचुआ, जैव निगरानी हेतु चुना गया जीव था, जो भूमि में पाई जाने वाली भारी धातुओं का निस्सारण करता है, ना कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है। इसलिए हमारी मिट्टी को देसी केंचुए की गतिविधि को पुर्न-संचालित करने की आवश्यकता है। ना कि विदेश से आयातित आयसिना फाईटिड्डा नामक जीव की, जो गोबर इत्यादि खाकर वर्मी कंपोस्ट बनाता है।
हिमाचल प्रदेश फल-सब्जी राज्य के रूप में प्रतिवर्ष लगभग 7500 करोड़ का राजस्व संग्रहित कर है। लेकिन इस उत्पादन के पीछे भी सैकड़ों टन रसायनिक खादों एवं कीटनाशकों का प्रयोग समाहित है। यह रासायनिक खादें एवं कीटनाशक मात्र अनुमोदित ही नहीं है, अनुमोदित से अधिक संख्या तथा मात्रा में यह प्रदेश के हर कोने में प्रयोग हो रहे हैं। जो केवल पहाड़ के स्वास्थ्य ही नहीं अपितु पूरे देश के उपभोक्ताओं के लिए प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। 2012 तक के आंकड़ों के अनुसार 3.5 प्रतिशत तक के सब्जी-फलों के नमूनों में विभिन्न कीटनाशकों के अंश मिले हैं। आशंका है कि यह आंकड़ा हर वर्ष बढ़ ही रहा होगा। यह स्थिति देशभर में भोज्य उत्पादक किसान एवं उपभोक्ता के बीच एक गंभीर अविश्वास को पैदा कर रही है। आज ’सबल भारत-स्वच्छ भारत’ के साथ स्वस्थ भारत का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा रचित तकनीक ’सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती’ स्वस्थ भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। प्रदेश में अभी तक लगभग सवा लाख किसानों ने इसकी सफलतापूर्वक शुरूआत कर इस दिशा में नींव का पत्थर रख दिया है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का इस दिशा में विशेष लगाव इस पुण्य कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में और मददगार साबित हो रहा है। प्राकृतिक खेती विधि से न सिर्फ किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को स्वस्थ्य खाद्य पदार्थ मिलना भी शुरू हुआ है। इतना ही नहीं पर्यावरण हितैषी यह प्राकृतिक खेती विधि भारत की ओर से सतत विकास लक्ष्यों की पूर्ती के लिए भी एक सराहनिय कदम है।
प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल
कार्यकारी निदेशक
प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना, हिमाचल सरकार
CM orders launch of 4th phase of BPL identification survey from 1st February
प्रदेश के इतिहास में पहली बार सभी पंचायतों में नियुक्त होंगे प्रशासक : जयराम ठाकुर
मान सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, गन्ने पर 68.50 रुपए प्रति क्विंटल सब्सिडी को मंजूरी*
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पंजाब को गैंगस्टर-मुक्त राज्य बनाने के लिए ‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत की
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने पर बदलेंगे हिमाचल की सियासत के समीकरण
Wholesale Medicine Business Gains Momentum with B2B PCD Hub Pharma Company
Where to Take Admission for B.Tech After Class 12: A Complete Guide for Engineering Aspirants
Punjab Govt duty bound to carve egalitarian society as preached by Sri Guru Ravidass Maharaj ji: CM Bhagwant Singh Mann*
How to Prepare for Competitive Examinations: A Step-by-Step Strategy for Aspirants