शिमला. यह सियासत का रंगमंच हैं, जहां पर मंच पर उतरते ही पूरी जन्म पत्री खुल जाती है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु होता है और गढ़ मुर्दे उखाड़े जाने लगते हैं। ऐसा ही अब मंडी से लोकसभा चुनाव में भाजपा की टिकट से चुनावी मैदान में उतरीं कंगना रणौत के साथ हो रहा है। मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी और अभिनेत्री कंगना रणौत गोमांस विवाद में घिर गईं हैं। कंगना ने बहुत पहले अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर गोमांस खाने को लेकर पोस्ट की थी और कहा था कि गोमांस खाना गलत नहीं है। अब चुनाव लड़ने जनता के बीच आईं हैं तो गोमांस विवाद से घिर गईं हैं। कंगना भाजपा से टिकट लेकर आईं हैं और भाजपा हमेशा ही धर्म की राजनीति करती है। जय श्रीराम का नारा लगाने वाली पार्टी की उम्मीदवार गोमांस खाने को सही ठहराए, ये सही नहीं है। कांग्रेस पार्टी को कंगना के खिलाफ बड़ा मुद्दा मिल गया है, जिससे सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक गोमांस विवाद छाया हुआ है।
कांग्रेस सरकार में मंत्री और मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह ने बिना नाम लिए लिखा है कि हिमाचल देवी देवताओं का पवित्र स्थल है। यहां गोमांस खाने वाले चुनाव लड़ें, यह देव संस्कृति के लिए चिंता का विषय है। विक्रमादित्य सिंह ने आगे लिखा कि इसका राजनीति से कोई सरोकार नहीं है। विक्रमादित्य सिंह का यह सीधा हमला कंगना रणौत पर ही था, क्योंकि गोमांस खाने को लेकर कंगना रणौत की सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहीं हैं। कांग्रेसी नेताओं के बयान पर कगना रणौत ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह न तो गोमांस खाती हैं और न ही रेड मीट खाती हैं। कंगना ने कहा कि यह उन्हें बदनाम करनी की साजिश है। लेकिन सोशल मीडिया और मीडिया में कंगना की वह सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने गोमांस को लेकर अपनी बात कही थी। जिससे अब कंगना की किस पोस्ट पर लोग भरोसा करेंगे, यह जनता की जाने।
मंडी के सियासी मंच पर कंगना रणौत के गोमांस का विवाद छिड़ा है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक प्रदेश भाजपा के किसी नेता ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही कंगना का बचाव किया है। कंगना ने जरुर अपना स्पष्टीकरण दिया है।
यह तय है कि सियासत में गोमांस का बड़ा मुद्दा कांग्रेस पार्टी को मिल गया है। जिससे कंगना के खिलाफ एक बड़े चुनावी हथियार के रुप में कांग्रेस नेता उपयोग करेंगे और हर मोर्चे पर कंगना को घेरने का प्रयास करेंगे। यह मुद्दा कांग्रेस के लिए चुनावी संजीवनी भी साबित हो सकता है क्योंकि भाजपा नेता चुनावी समर में श्रीराम मंदिर बनाने को मुद्दा बनाए हुए हैं। ऐसे में गोमांस विवाद भाजपा उम्मीदवार को कटघरे में खड़ा जरुर करता है और भाजपा नेताओं के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा। पूरी चुनाव में कांग्रेस इस मुद्दे को उठाएगी और भाजपा नेता पूरी तरह किनारा करते हुए नजर आएंगे।


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