संदीप उपाध्याय
विधानसभा सत्र के इतिहास में शायद पहली बार देखने को मिला कि सत्ता पक्ष ने विपक्ष को घेरा हो और विपक्षी दल के विधायक बोल ही नहीं पा रहे हों। सदन में विपक्षी दल के विधायकों की बोलती बंद करने में कामयाब हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू सियासत के बड़े खिलाड़ी साबित हुए। सुक्खू ने अपनी सियासी रणनीति ऐसी बनाई कि विपक्ष के नेता बोल ही नहीं पा रहे थे। सदन में हमेशा ऐसा देखा जाता है कि सरकार को विपक्ष के विधायक ही मुश्किल सवालों को उठाकर घेरते हैं। विपक्ष के सवालों का सत्ता पक्ष के पास सही जवाब नहीं होता, जिससे सरकार कटघरे में खड़ी नजर आती है। लेकिन सुक्खू की सियासत में सब उल्टा पुल्टा कर दिया।
मानसून सत्र के पहले दिन की शुरुआत प्रदेश में आई आपदा पर चर्चा को लेकर हुई। सरकार ने भी चर्चा की बात कही, तो विपक्ष ने भी आपदा पर चर्चा की बात कही। लेकिन सुक्खू ने सदन में प्रदेश की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के प्रस्ताव को लेकर विपक्ष को घेर दिया। सुक्खू ने विपक्षी विधायकों से खुले तौर पर कहा कि वह राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के प्रस्ताव को अपना समर्थन दें। सुक्खू ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी सरकार के लिए कुछ नहीं मांग रहे हैं, वह तो आपदा प्रभावित परिवारों और प्रदेश की जनता के लिए मांग रहे हैं। प्रदेश की जनता के हित में विपक्ष को भी प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए। लेकिन विपक्ष ने समर्थन नहीं किया और सुक्खू लगातार विपक्ष को घेरते रहे।
इसी बीच मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपनी सियासी रणनीति के तहत सदन में पूर्व भाजपा सरकार के समय लिए गए कर्ज को लेकर आर्थिक हालत का स्वेतपत्र विधानसभा में पेश कर दिया। जिसमें बताया कि पूर्व सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण प्रदेश सरकार पर 92,774 करोड़ की देनदारियां हैं। पूर्व भाजपा सरकार ने पांच साल में लगातार कर्ज लिया जिससे प्रदेश सरकार पर 76,631 करोड़ का कर्ज चढ़ गया। इस तरह सुक्खू ने श्वेत पत्र के माध्यम से भी विपक्ष को घेरा। सुक्खू अपनी रणनीति से विपक्ष का घेरने में कामयाब रहे और विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास ही करता रहा लेकिन वॉकआउट के अलावा कुछ ज्यादा नहीं कर सका। जिससे सुक्खू ने साबित कर दिया कि वह सियासत के बड़े खिलाड़ी हैं।
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