मुख्य मंत्री के नेतृत्व में पंजाब विधान सभा की ओर से बांधों पर सी.आई.एस.एफ. तैनात करने के विरोध में ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित
पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए पानी की एक बूंद भी नहीं
देश को ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति में न उलझाएं-मुख्य मंत्री की ओर से भाजपा और कांग्रेस की कड़ी निंदा
मोदी के पास यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता का समय तो है, लेकिन पंजाब और हरियाणा के बीच मतभेद सुलझाने का नहीं
पंजाबियों के खिलाफ ‘गद्दार’ या ‘सरदार’ की नीति अपना रही भाजपा
पानी के मुद्दे पर गंभीर न होने के लिए विपक्ष की निंदा
बाजवा पर मुख्य मंत्री की कुर्सी हथियाने के लिए अवसरवादी होने का आरोप, पंजाब के प्रति विपक्ष के खोखले ज्ञान पर उठाए सवाल
चंडीगढ़, 11 जुलाई
पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत सिंह मान ने पिछले कुछ दशकों से कांग्रेस और भाजपा की फूट डालने वाली नीतियों के लिए दोनों पार्टियों पर आज जमकर हमला बोलते हुए कहा कि यदि ये पार्टियां देश के प्रति ईमानदारी से काम करें तो हमारा देश हर क्षेत्र में बेमिसाल तरक्की का गवाह बन सकता है।
बांधों पर सी.आई.एस.एफ. की तैनाती के विरोध में पंजाब विधान सभा में पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस में हिस्सा लेते हुए मुख्य मंत्री ने कहा कि इन राजनीतिक पार्टियों ने लोगों को संकीर्ण, क्षेत्रीय, भाषाई, सांप्रदायिक और अन्य आधारों पर बांटा, जिसके कारण राज्य एक-दूसरे के साथ टकराव की स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों का एकमात्र उद्देश्य ऐसे गलत कार्यों के माध्यम से राजनीतिक सत्ता हासिल करना है, जिसने देश और राज्यों को अपूरणीय नुकसान पहुंचाया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यदि ये पार्टियां देश के लोगों को आपस में लड़ाने का काम बंद कर दें तो हमारा देश किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकता है।
दोनों पार्टियों के गलत इरादों का उदाहरण देते हुए मुख्य मंत्री ने कहा कि यदि मोदी यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध को खत्म कर सकते हैं, जैसा कि उनके मीडिया द्वारा प्रचारित किया जा रहा है, तो फिर उन्हें पंजाब और हरियाणा के बीच सौहार्दपूर्ण स्थिति सुनिश्चित करने से कौन रोक रहा है? उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों का रिश्ता भाइयों जैसा है और ये केंद्रीय अनाज पूल में 70 प्रतिशत से अधिक योगदान देते हैं, लेकिन पिछले वर्षों में पंजाब और हरियाणा में सत्ता संभालने वाली इन दोनों पार्टियों ने दोनों राज्यों के बीच मतभेद पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिसके आड़ में वे सत्ता का आनंद ले रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि दोनों राज्यों में कई चीजें समान होने के बावजूद ऐसी ताकतें हमेशा यह सुनिश्चित करने के लिए उत्सुक रहती हैं कि दोनों राज्य पानी जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे से लड़ते रहें।
मुख्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व गुरु बनने के इच्छुक तो हैं, लेकिन राज्य के मामलों के बारे में उन्हें कोई चिंता-फिक्र नहीं है और इस रवैये के चलते नागरिकों के बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह से दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में हालात बहुत खराब हैं क्योंकि पहलगाम हमले से पहले बनी फिल्म भारत में रिलीज नहीं होने दी जा रही, लेकिन प्रधानमंत्री किसी भी समय पाकिस्तान जाकर ‘बिरयानी’ खा सकते हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री विदेशों के दौरों पर रहते हैं, दूसरी तरफ अपने ही देश में वे 140 करोड़ भारतीयों की चिंताओं को दूर करने में हमेशा नाकाम रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पास 10,000 से भी कम आबादी वाले देशों से विदेशी सम्मान हासिल करने का समय तो है, लेकिन देश के महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान देने के लिए उनके पास कोई समय नहीं है।
मुख्य मंत्री ने दोहराया कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने कहा कि पानी का मुद्दा राज्य और इसके लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दा है और राज्य सरकार पानी की हर कीमती बूंद को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के पानी की गाथा साल 1955 से शुरू होती है, लेकिन दुर्भाग्य से पानी के बारे में कोई मूल्यांकन नहीं हुआ, जो कि हर 25 साल बाद होना चाहिए था। भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के हाल के फैसले ने पश्चिमी नदियों (सिंधु, जेहलम, चनाब, उज्ज, कश्मीर नदी) के पानी के अन्य राज्यों को अधिक उपयोग का अधिकार तो दे दिया है, जबकि पंजाब को अतिरिक्त पानी देने के लिए विचार नहीं किया गया है, जो कि राज्य का हक बनता है।
मुख्य मंत्री ने कहा कि इससे पंजाब के लिए 23 एम.ए.एफ. अतिरिक्त पानी सुनिश्चित किया जा सकता है, जो कि राज्य और इसके किसानों की पानी की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिमी नदियों के पानी को प्राथमिकता के आधार पर पंजाब को आवंटित किया जाना चाहिए और हिमाचल प्रदेश में मौजूदा भाखड़ा और पौंग बांधों के ऊपर नए स्टोरेज बांध बनाए जाने चाहिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इससे पश्चिमी नदी के पानी को स्टोर और नियंत्रित करने में काफी वृद्धि होगी। उन्होंने आगे कहा कि यह समय की जरूरत है कि पंजाब को उचित मुआवजा दिया जाए, जिसने देश को अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पानी और उपजाऊ जमीन जैसे बेशकीमती प्राकृतिक संसाधनों को दांव पर लगा दिया।
मुख्य मंत्री ने कहा कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) राज्य के लिए एक श्वेत हाथी बन चुका है, जिसका पुनर्गठन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बी.बी.एम.बी. में पंजाब का 60 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यह हमेशा राज्य के हितों के खिलाफ काम करता आया है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड राज्य सरकार से फंड लेकर इसके खिलाफ ही केस दायर करता रहता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि किसी को भी राज्य के हितों को खतरे में डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
केंद्र सरकार द्वारा राज्य के बांधों पर सी.आई.एस.एफ. तैनात करने के कदम का कड़ा विरोध करते हुए मुख्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि यह कभी लागू न हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार सी.आई.एस.एफ. के जवान भाखड़ा बांध पर तैनात किए जाएंगे, जिस पर राज्य को बिना किसी उद्देश्य के लगभग 9 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब पंजाब पुलिस पहले ही बांध की सुरक्षा मुफ्त में सुनिश्चित कर रही है, तो हम यह पैसा बी.बी.एम.बी. को क्यों दें। उन्होंने कहा कि यदि हम सीमाओं की रक्षा कर सकते हैं, तो हम बांधों की भी रक्षा कर सकते हैं।
मुख्य मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा होने के कारण पंजाब आतंकवाद और नशे के खिलाफ हमेशा अग्रणी रहकर देश के लिए जंग लड़ता आया है, लेकिन यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य में जबरन अर्धसैनिक बल लगाकर इसका भारी खर्च वहन करने के लिए कहा जाता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दीनानगर (पठानकोट) में आतंकी हमले के बाद, भारत सरकार ने हमले के दौरान अर्धसैनिक बल भेजने के लिए राज्य से 7.5 करोड़ रुपए की मांग की थी। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण और तर्कहीन है क्योंकि जिस राज्य के सबसे ज्यादा सपूत सशस्त्र सेनाओं में देश की सेवा करते हुए शहीद होते हैं, उसे यह अतिरिक्त खर्च वहन करने के लिए मजबूर किया जाता है।
मुख्य मंत्री ने केंद्र सरकार पर पंजाब और पंजाबियों को निशाना बनाने और पंजाबियों की राष्ट्रीयता पर सवाल उठाने के लिए कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सीमाओं की रक्षा और देश को अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब ने अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि या तो हमें ‘गद्दार’ कहा जाता है या ‘सरदार’, जो कि बहुत ही अपमानजनक और असहनीय है। उन्होंने कहा कि किसी को भी पंजाबियों की राष्ट्रवादी भावना और देशभक्ति पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमें देश के प्रति अपने प्यार के लिए इन ताकतों के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है क्योंकि वतन के प्रति हमारा प्यार हमारे शानदार योगदान से स्पष्ट रूप से झलकता है।
मुख्य मंत्री ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य के अधिकारों को सरेआम अनदेखा किया जा रहा है और विपक्षी दलों द्वारा सत्ता वाले राज्यों, खासकर पंजाब की शांति भंग करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। मुख्य मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा सी.बी.आई. और ई.डी. के दुरुपयोग से कोई डर नहीं है और वे बिना किसी भय के लोगों की सेवा करते रहेंगे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग को पंजाबियों द्वारा कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्य मंत्री ने पंजाब की विपक्षी पार्टियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इन पार्टियों ने नदी के पानी के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई क्योंकि वे हमारे पानी को लूटने के मुख्य दोषी हैं। उन्होंने कहा कि अपने आप को ‘पानी के रक्षक’ कहने वालों ने राज्य को अपूरणीय नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पारित किया गया कानून अभी भी कानूनी जांच के अधीन है। भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि अमीर घरों के सत्ताधारी या सत्ता के दौरान नहरों का पानी सीधे जिनके खेतों तक पहुंचता था, उन्हें पानी की महत्वता के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं है, जिसके कारण राज्य को नुकसान सहना पड़ा है।
मुख्य मंत्री ने कहा कि इन लोगों ने पिछले छह दशकों से अधिक समय से इस गंभीर और भावनात्मक मुद्दे पर लोगों को गुमराह किया है और पंजाब विरोधी ताकतों के साथ मिलकर राज्य के पानी को लूटा है। उन्होंने कहा कि लोग अच्छी तरह जानते हैं कि एस.वाई.एल. का सर्वेक्षण किसने करवाया था या चांदी की कही नाल नहर का नींव पत्थर किसने रखा था। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसके विपरीत उनकी सरकार ने दूसरे राज्यों को पानी की एक बूंद भी न देकर पंजाब के हितों की रक्षा की है।
विपक्षी नेताओं को कड़े हाथों लेते हुए मुख्य मंत्री ने उनकी पंजाबी भाषा के कम ज्ञान पर सवाल उठाया और कहा कि शायद वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के कॉन्वेंट स्कूल ने उन्हें पंजाबी के बारे में नहीं सिखाया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी नेता केवल सदन की कार्यवाही से भागने का बेतुका बहाना ढूंढ रहे हैं ताकि वे लोगों के सामने बेनकाब होने से बच सकें। भगवंत सिंह मान ने कहा कि विपक्षी नेता मुख्य मंत्री की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए अवसरवादी हैं, जिसके लिए वे कई तरह की संकीर्ण चालें चल रहे हैं।
मुख्य मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह सदन पंजाब के 3.5 करोड़ लोगों का घर है और केवल उनके द्वारा चुने गए व्यक्ति को ही उनकी सेवा करने और इस सदन में रहने का सम्मान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वास्तव में लोग ऐसे संदिग्ध चरित्र वाले सत्ता के भूखे नेताओं को नहीं चुनते, जिन्होंने कभी भी लोगों की परवाह नहीं की। भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे इन पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों की घटिया कार्यप्रणाली के कारण ही राजनीति में आए हैं।
मुख्य मंत्री ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी की तीन विधान सभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीती, जो आम जनता में उनके प्रति मोहभंग होने का प्रत्यक्ष सबूत है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नेताओं की कोई विश्वसनीयता नहीं है, जिसके कारण लोगों में उनके प्रति बहुत ज्यादा नफरत पैदा हो गई है। उन्होंने कांग्रेसी नेताओं को याद दिलाया कि राज्य में सामाजिक सौहार्द इतना मजबूत है कि पंजाब की उपजाऊ धरती पर कोई भी बीज उग सकता है, लेकिन यहां नफरत का बीज कभी भी किसी भी कीमत पर नहीं उगेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब महान गुरुओं, संतों-महापुरुषों और पीरों-पैगंबरों की पवित्र धरती है, जिन्होंने हमें आपसी प्यार और संयम-संतोष का रास्ता दिखाया है।
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