हरियाणा की नई पानी की मांग क्षमता से भी अधिक, पहले के समझौतों का उल्लंघन: बरिंदर गोयल
चंडीगढ़, 15 मई:
पंजाब के जल संसाधन और भूमि एवं जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी.बी.एम.बी.) की आज हुई तकनीकी कमेटी की बैठक के दौरान हरियाणा ने 9,525 क्यूसेक पानी की अपनी मौजूदा असंभव मांग को और बढ़ाकर 10,300 क्यूसेक कर दिया है जिससे सिद्ध होता है हरियाणा पानी के बंटवारे संबंधी बातचीत को और जटिल बना रहा है।
पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों के अधिकारियों की बैठक के बाद विवरण साझा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हरियाणा की बढ़ती मांग से स्पष्ट होता है कि वह साझे पानी संबंधी हमारी चुनौतियों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचाने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की चालों से लगता है कि वह इस मुद्दे को हल ही नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि बी.बी.एम.बी. के चेयरमैन की अध्यक्षता में आज हुई तकनीकी कमेटी की बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव कृष्ण कुमार और मुख्य अभियंता शेर सिंह ने पंजाब का प्रतिनिधित्व किया जबकि हरियाणा और राजस्थान के मुख्य अभियंताओं के साथ केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में ऑनलाइन भाग लिया।
कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, “हरियाणा ने पहले 8,500 क्यूसेक पानी की मांग की थी जिसके बारे में हमारी तकनीकी टीम ने पहले ही स्पष्ट रूप से बता दिया था कि इतना पानी प्रदान करना असंभव है लेकिन फिर भी हम मानवता के आधार पर हरियाणा को पहले ही 4 अप्रैल से विशेष रूप से पीने के पानी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए 4,000 क्यूसेक पानी सप्लाई कर रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि राज्य द्वारा पहले ही पानी देने संबंधी अपनी सीमाओं के बारे में हरियाणा को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद हरियाणा ने 21 मई से 10,300 क्यूसेक पानी की मांग की है, जबकि उनके पिछले लिखित पत्राचार में 9,525 क्यूसेक का अनुरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि पानी की मांग में यह वृद्धि बहुत अधिक और अनुचित है।
बरिंदर कुमार गोयल ने हरियाणा की मांगों को पूरा करने संबंधी जमीनी हकीकत के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि भाखड़ा मेन लाइन (बी.एम.एल.) की अधिकतम क्षमता 11,700 क्यूसेक है। पंजाब को अपनी महत्वपूर्ण जरूरतों के लिए कम से कम 3,000 क्यूसेक की आवश्यकता है। हरियाणा की 10,300 क्यूसेक की मांग से सीधे तौर पर पंजाब में नहर का पानी खत्म ही हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा की यह मांग पानी सप्लाई करने के बुनियादी ढांचे की सुरक्षित क्षमता से भी अधिक है। यह स्थिति तब और भी भयानक हो जाती है जब बी.एम.एल. की मरम्मत का काम चल रहा हो।
उन्होंने कहा कि पंजाब के अधिकारियों ने बैठक के दौरान हरियाणा की 9,525 क्यूसेक पानी की पिछली लिखित अनुरोध संबंधी दस्तावेजी सबूत भी पेश किए जिससे हरियाणा की नई और पिछली मांग के बीच बड़ा अंतर साफ-साफ उजागर होता है। उन्होंने आगे बताया कि बी.बी.एम.बी. चेयरमैन ने मांग के इस अंतर को देखते हुए मामले की और आगे जांच करने का भरोसा दिया।
कैबिनेट मंत्री ने कहा, “इन तकनीकी रूप से असंभव मांगों से हरियाणा जानबूझकर पानी के बंटवारे के प्रबंधन में पेचीदगियां पैदा कर रहा है जबकि पंजाब ने बी.बी.एम.बी. के सभी कानून और नियमों का लगातार पालन किया है लेकिन हरियाणा निरंतर अपना रवैया बदलता रहता है।”
मंत्री ने पानी की मौजूदा सप्लाई के बारे में पंजाब की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि 4 अप्रैल से हरियाणा को दिया जा रहा 4,000 क्यूसेक पानी पंजाब के बंटवारे में से लिया जा रहा है और हमने आज की बैठक के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर पंजाब इस सप्लाई का बनता कुल पानी वापस लेगा।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बैठक की शुरुआत में राजस्थान सरकार ने जरूरत के समय उन्हें पानी की सुचारू सप्लाई करने के लिए पंजाब की सराहना की जबकि इसके विपरीत हरियाणा ने पानी की मांग में बहुत ज्यादा वृद्धि की।
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