– देश को पोटाश के आयात से मिलेगी राहत, पंजाब देश की जरूरतों को करेगा पूरा
– राज्य को मिलेगी रॉयल्टी, लेकिन जमीनें अधिग्रहित नहीं होंगी
फाजिल्का/ चंडीगढ़, 6 फरवरी
पंजाब के खनन एवं जल संसाधन विभाग के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खनन के क्षेत्र में पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए लगातार खोज जारी रखी थी, जो अब सफल हो गई है। राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में तीन खनन ब्लॉकों में पोटाश के बड़े भंडार मिले हैं।
आज यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि देश में अन्य किसी भी स्थान पर पोटाश खनन नहीं होता, और पंजाब पहला राज्य है जहां यह खनिज पदार्थ पाया गया है। अब तक देश प्रतिवर्ष 50 लाख टन पोटाश का आयात करता था, जिसका उपयोग खेतों में उर्वरक के रूप में और अन्य उद्योगों में किया जाता था। लेकिन अब श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों के तीन खनन ब्लॉकों में यह भंडार मिले हैं। उन्होंने बताया कि श्री मुक्तसर साहिब में कबरवाला के पास और फाजिल्का जिले में शेरेवाला, रामसर और दलमीर खेड़ा ब्लॉक पाए गए हैं।
उन्होंने इस अवसर पर इस विषय को लेकर लोगों में पैदा हो रही आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि पोटाश को निकालने के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा और न ही जमीन को कोई नुकसान होगा। बल्कि, ड्रिलिंग सिस्टम के माध्यम से यह खनिज निकाला जाएगा और इससे किसानों की भूमि स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि इससे पोटाश की प्रोसेसिंग से संबंधित उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि पोटाश खनिज 450 मीटर की गहराई पर पाया गया है, और इसे निकालने से पहले सरकार द्वारा सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का पूर्ण अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन तीन ब्लॉकों के आसपास के क्षेत्रों में भी खोज जारी रखे हुए है।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि श्री अरविंद केजरीवाल द्वारा खनन के माध्यम से पंजाब को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का जो वादा किया गया था, यह परियोजना उसे पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नीलामी कराने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन इससे मिलने वाली रॉयल्टी पंजाब सरकार को ही मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कबरवाला ब्लॉक से खनन करने के लिए पंजाब सरकार ने अपनी सहमति दे दी है, और जैसे ही केंद्र सरकार द्वारा नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, खनन कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को यह भरोसा दिलाती है कि इस परियोजना के तहत उनकी कोई भी जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इन तीन ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल लगभग 18 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसके आसपास के क्षेत्रों में भी खनिज की खोज की जा रही है।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पिछले साल रेत और बजरी के खनन से राज्य को 288 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, और आने वाले दिनों में राज्य में 104 और खदानें शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, नदियों से रेत निकालने के लिए 27 स्थानों की पहचान भी की गई है।
इस अवसर पर उनके साथ फाजिल्का के विधायक नरिंदर पाल सिंह सवना, बल्लुआना के विधायक अमनदीप सिंह गोल्डी मुसाफिर, जलालाबाद के विधायक जगदीप गोल्डी कंबोज, खनन निदेशक अभिजीत कपलीश, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक शोइम रंजन महापात्रा, डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू, एसएसपी वरिंदर सिंह बराड़, पर्यवेक्षक इंजीनियर राजन ढींगड़ा और कार्यकारी इंजीनियर जगसीर सिंह भी उपस्थित थे।
इससे पहले कैबिनेट मंत्री ने गांव शेरेवाला और शेरगढ़ का दौरा किया और उन स्थानों का निरीक्षण किया, जहां जमीन के नीचे पोटाश पाया गया है।
दक्षिण-पश्चिमी पंजाब के तीन ब्लॉकों में मिला पोटाश का बड़ा भंडार – बरिंदर कुमार गोयल
– देश को पोटाश के आयात से मिलेगी राहत, पंजाब देश की जरूरतों को करेगा पूरा
– राज्य को मिलेगी रॉयल्टी, लेकिन जमीनें अधिग्रहित नहीं होंगी
फाजिल्का/ चंडीगढ़, 6 फरवरी
पंजाब के खनन एवं जल संसाधन विभाग के कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खनन के क्षेत्र में पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए लगातार खोज जारी रखी थी, जो अब सफल हो गई है। राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में तीन खनन ब्लॉकों में पोटाश के बड़े भंडार मिले हैं।
आज यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि देश में अन्य किसी भी स्थान पर पोटाश खनन नहीं होता, और पंजाब पहला राज्य है जहां यह खनिज पदार्थ पाया गया है। अब तक देश प्रतिवर्ष 50 लाख टन पोटाश का आयात करता था, जिसका उपयोग खेतों में उर्वरक के रूप में और अन्य उद्योगों में किया जाता था। लेकिन अब श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों के तीन खनन ब्लॉकों में यह भंडार मिले हैं। उन्होंने बताया कि श्री मुक्तसर साहिब में कबरवाला के पास और फाजिल्का जिले में शेरेवाला, रामसर और दलमीर खेड़ा ब्लॉक पाए गए हैं।
उन्होंने इस अवसर पर इस विषय को लेकर लोगों में पैदा हो रही आशंकाओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि पोटाश को निकालने के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा और न ही जमीन को कोई नुकसान होगा। बल्कि, ड्रिलिंग सिस्टम के माध्यम से यह खनिज निकाला जाएगा और इससे किसानों की भूमि स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि इससे पोटाश की प्रोसेसिंग से संबंधित उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि पोटाश खनिज 450 मीटर की गहराई पर पाया गया है, और इसे निकालने से पहले सरकार द्वारा सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का पूर्ण अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इन तीन ब्लॉकों के आसपास के क्षेत्रों में भी खोज जारी रखे हुए है।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि श्री अरविंद केजरीवाल द्वारा खनन के माध्यम से पंजाब को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का जो वादा किया गया था, यह परियोजना उसे पूरा करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में नीलामी कराने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन इससे मिलने वाली रॉयल्टी पंजाब सरकार को ही मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कबरवाला ब्लॉक से खनन करने के लिए पंजाब सरकार ने अपनी सहमति दे दी है, और जैसे ही केंद्र सरकार द्वारा नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, खनन कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार किसानों को यह भरोसा दिलाती है कि इस परियोजना के तहत उनकी कोई भी जमीन अधिग्रहित नहीं की जाएगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इन तीन ब्लॉकों का कुल क्षेत्रफल लगभग 18 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन इसके आसपास के क्षेत्रों में भी खनिज की खोज की जा रही है।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि पिछले साल रेत और बजरी के खनन से राज्य को 288 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, और आने वाले दिनों में राज्य में 104 और खदानें शुरू की जाएंगी। इसके अलावा, नदियों से रेत निकालने के लिए 27 स्थानों की पहचान भी की गई है।
इस अवसर पर उनके साथ फाजिल्का के विधायक नरिंदर पाल सिंह सवना, बल्लुआना के विधायक अमनदीप सिंह गोल्डी मुसाफिर, जलालाबाद के विधायक जगदीप गोल्डी कंबोज, खनन निदेशक अभिजीत कपलीश, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक शोइम रंजन महापात्रा, डिप्टी कमिश्नर अमरप्रीत कौर संधू, एसएसपी वरिंदर सिंह बराड़, पर्यवेक्षक इंजीनियर राजन ढींगड़ा और कार्यकारी इंजीनियर जगसीर सिंह भी उपस्थित थे।
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