-खुद आठ साल सांसद रहे सीएम मान किस आधार पर कर रहे 131वां संशोधन वापिस लिए जाने का दावा
-परगट का आरोप- भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे पंजाब के सीएम मान
-कैबिनेट बुलेटिन में प्रकाशित हो चुके बिल को हटाने की कैबिनेट कमेटी ही दे सकती है मंजूरी
चंडीगढ़, 26 नवंबर, 2025
पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने चंडीगढ़ के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को आड़े हाथों लेते हुए चेताया कि पंजाब के लोगों को गुमराह करना बंद करें। वह यह न समझें कि पंजाबियों को कुछ नहीं पता है, वे सब कुछ जानते और समझते हैं।
मीडिया से बातचीत में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव परगट सिंह ने कहा कि सीएम मान यह दावा कर रहे हैं कि केंद्र ने 131वें संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ को छीनने के कदम को वापिस ले लिया है, जबकि यह इतना आसान नहीं होता है। भगवंत मान तो खुद 8 साल तक सांसद रहे हैं। वह इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि एक बार कैबिनेट किसी निर्णय को मंजूरी देती है, तो वह संसद के बुलेटिन में प्रकाशित होता है।
चंडीगढ़ को लेकर किए जा रहे संशोधन बिल को भी बुलेटिन में छापा गया है। बुलेटिन में कुछ भी बिना कैबिनेट मंजूरी के नहीं छपता है। ऐसे में बुलेटिन से उसे बिना कैबिनेट की मंजूरी के हटाया नहीं जा सकता है।
पद्मश्री परगट सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा इस बिल को आगे बढ़ाना चाहती है। वह चंडीगढ़ को किसी तरह पंजाब से छीनकर अलग करना चाहती है। यह 131वां संशोधन भी इसी का एक हिस्सा है। सीएम मान लोगों को गुमराह करके भाजपा के एजेंडे को ही आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर यह बिल पास होता है तो चंडीगढ़ एक साधारण केंद्र शासित प्रदेशों की तरह होगा। इसको लेकर जो अधिकार अभी पंजाब के गर्वनर के पास हैं, वह अधिकार किसी अन्य स्वंतत्र शासक को बैठाकर सौंप दिए जाएंगे। जिससे पंजाब का चंडीगढ़ पर कोई अधिकार नहीं रहेगा।
भाजपा की इस साजिश को कांग्रेस कभी भी सफल नहीं होने देगी। कांग्रेस पहले ही इसके खिलाफ अपना स्टैंड क्लीयर कर चुकी है। चंडीगढ़ पंजाब का हिस्सा है, हिस्सा था और हिस्सा ही रहेगा। इसे किसी भी कीमत पर अलग नहीं होने दिया जाएगा। कांग्रेस इसके लिए हर तरह की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। कांग्रेस पंजाब के मुद्दों को लेकर सीएम मान के साथ दिल्ली जाकर धरना देने और राष्ट्रपति से मिलने तक के लिए पेशकश कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि आप सरकार पहले ही पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट भंग करने के मुद्दे और बीबीएमबी के मुद्दे पर भी पंजाब अभी तक केंद्र पर कोई दवाब नहीं बना पाई है। न ही अपना डैम सेफ्टी एक्ट ही बनाने को लेकर कोई प्रयास किया जा रहा है।
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