शिमला. टोक्यों में ओलंपिक खेल चले रहे हैं, तो चर्चा खेलों की छिड़ी है। ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की जीत पर बधाईयों का तांता लगा है। मुख्यमंत्री से लेकर खेल मंत्री भी बधाई दे रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के वर्तमान खेल मंत्री राकेश पठानिया भी खेलों में रुचि रखते हैं। जब वह खेल मंत्री नहीं थे तो प्रदेश की खेल नीति पर सवालों पर सवाल दाग रहे थे। राकेश पठानिया ने विधानसभा के अंदर अपनी ही सरकार की खेल नीति पर दर्जनों सवाल उठाए। पठानिया ने विधानसभा में खेल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन खेल नीति प्रतिभावान न होने के कारण प्रतिभाएं उभर कर नहीं आ रही हैं। खेल का बजट कम हैं, अच्छे कोच नहीं हैं, खेल मैदान नहीं हैं, इसके अलावा भी कई सुविधाएं नहीं हैं। जिससे हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। पठानिया ने खेल नीति पर यह सब सवाल तब उठाए थे जब खेल मंत्री गोविंद ठाकुर थे। अब राकेश पठानिया ही खेल मंत्री बन गए हैं। पठानिया के खेल मंत्री बने हुए एक साल का समय हो गया है। खेल मंत्री बनने के बाद पठानिया ने अपने ही सवालों को हल करने के लिए कितना प्रयास किया, यह समझ नहीं आ रहा है। सवाल हल हुए कि अभी भी खड़े हुए हैं, इसका जवाब खेल मंत्री ही दे सकते हैं। खेल मंत्री ने अपने ही सवालों हो हल करने के लिए कोई कदम उठाए हैं, अभी तक खेल विभाग की गतिविधियों में नजर नहीं आया। खेल मंत्री ने यह जरुर कहा था कि अब नई खेल नीति तैयार की जाएगी। जिसमें सभी पहलुओं को ध्यान रखा जाएगा। लेकिन अभी तक नई खेल नीति सामने नहीं आ सकी है। यह हो सकता है कि खेल मंत्री प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के दृष्टिगत खेल नीति में खेल मैदान का निर्माण करने, हर खेल के लिए बेहतर प्रशिक्षकों की नियुक्ति करने, प्रशिक्षण केंद्र खोलने, खिलाड़ियों को मिलने वाले भत्ते, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को मिलने वाले पुरस्कारों, खेल के लिए बेहतर उपकरण उपलब्ध कराने के बारे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन कर रहे हों कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस खेल में कौन सी तकनीकी का विकास हुआ है। जिसके कारण ही खेल नीति बनाने में समय लग रहा हो। इतने बड़ी खेल नीति बनाने और लागू करने के लिए बजट की भी जरुरत होगी, उसके साधन जुटाने के लिए भी मंत्री महोदय अध्ययन कर रहे होंगे। अब यही उम्मीद होगी कि खेल प्रिय खेल मंत्री राकेश पठानिया ऐसी खेल नीति लेकर आएंगे कि आगे भविष्य में हिमाचल के प्रतिभावान खिलाड़ी प्रदेश के साथ देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगे।
खेल मंत्री की घोषणाएं
1. कांगड़ा में स्पोर्टस यूनिवर्सिटी बनेगी
खेल मंत्री बनने के दूसरे या तीसरे दिन ही खेल मंत्री राकेश पठानिया ने कांगड़ा में स्पोर्टस यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान कर दिया था। खेल मंत्री का मानना था कि स्पोर्टस यूनिवर्सिटी बनने से खेलों को आधुनिक तकनीकी के माध्यम से प्रशिक्षण होगा और विकास होगा। यह भी बात हुई थी कि स्पोर्टस यूनिवर्सिटी खेल मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नूरपुर क्षेत्र में बनेगी। इसके लिए अधिकारियों को जमीन देखने की बात भी सामने आई थी। इसे घोषणा के बाद पठानिया ने केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजजू से भी दिल्ली में मुलाकात की थी। स्पोर्टस यूनिवर्सिटी की फाइल अब आगे कहां तक बढ़ी, इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है। मंत्री जी ने भी लंबे समय से इस बारे में कुछ नहीं कहा।
2. हर विधानसभा में बनेगा खेल स्टेडियम
खेल मंत्री राकेश पठानिया ने ऐलान किया था कि गांवों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहले हर विधानसभा क्षेत्र में एक खेल स्टेडियम बनाया जाएगा। जिससे क्षेत्र के खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही खेल की सुविधाएं हासिल किया जा सके। इन खेल स्टेडियम के लिए प्रारंभिक तौर पर लगभग 1 लाख रुपए की राशि भी प्रदान करने की बात की गई थी। अभी तक कहां कहां पर खेल स्टेडियम का निर्माण शुरु हुआ, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।
3. साइना नेहवाल की बैडमिंटन एकेडमी
प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल की बैडमिंटन एकेडमी खोलने के प्रयास भी हुए। इस मामले में साइन नेहवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात की थी। लेकिन अब इस अकादमी खोलने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची इसकी जानकारी नहीं मिल है।
4. विश्व स्तरीय विंटर गेम का ऐलान
खेल मंत्री राकेश पठानिया ने हिमाचल प्रदेश में विंटर खेलों की अपार संभावनाओं के चलते प्रदेश में विश्व स्तरीय विंटर खेलों को बढ़ावा देने का ऐलान किया था। इस संबंध में खेल मंत्री ने शिमला जिले के नारकंडा और चांशल क्षेत्र का दौरा भी किया था। लेकिन इसमें अभी क्या प्रगति हुई और क्या नीति बन रही है, इस बारे में खेल मंत्री ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया।
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