शिमला. हिमाचल की सियासत में विधानसभा के उपचुनावों की बिसात बिछ चुकी है। चुनावी मुकाबला कांग्रेस और कांग्रेस के बागियों के बीच हो रहा है। भाजपा ने कांग्रेस के बागी 6 नेताओं का उम्मीदवार बनाया है। जिससे दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के स्थानीय नेता दरकिनार कर दिए गए हैं। जिससे भाजपा को हर विधानसभा क्षेत्र में बगावत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं भाजपा नेताओं के बीच से ही बगावत की आवाज उठने लगी है कि सबसे बड़ी पार्टी के पास अपने की बड़े कदावर नेता हैं, तो कांग्रेस के नेताओं को उम्मीदवार बनाने की क्या जरुरत थी। अभी चुनाव भले ही प्रदेश की 6 विधानसभा क्षेत्र में हो रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के बागियों को उपचुनाव में टिकट देने के निर्णय से भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच सही संदेश नहीं गया है। कार्यकर्ताओं के मन में यह बात आ रही है कि अगर उनके क्षेत्र में भी कोई कांग्रेस का बड़ा नेता भाजपा में शामिल हो गया तो टिकट उसे मिलेगा। ऐसे में कार्यकर्ता अपने आप को असहज महससू कर रहे हैं। वहीं उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भाजपा पर हमला करते हुए कहते हैं कि चुनाव में भाजपा कहीं नहीं है। चुनावी मुकाबला कांग्रेस और कांग्रेस के बागियों के बीच है। भाजपा के स्थानीय नेता को किनारे लगा दिए गए हैं। कांग्रेस का यह भी सियासी तीर भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाला है।
भाजपा ने धर्मशाला में कांग्रेस से बगावत करने वाले सुधीर शर्मा को टिकट दिया तो वहां पूर्व मंत्री व सांसद किशन कपूर, पूर्व विधायक नैहरिया और गत चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे राकेश चौधरी ने भी विरोध दर्ज किया है। अभी तीनों ही नेता सुधीर शर्मा को टिकट देने से खफा हैं। वहीं सुजानपुर में राजेंद्र राणा को टिकट देने से गत चुनाव में प्रत्याशी रहे कैप्टन रणजीत सिंह राणा में विरोध दर्ज कर आजाद उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। रणजीत राणा हमीरपुर के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर रहे हैं। गत चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को टिकट न देने के बाद भाजपा ने रणजीत राणा को उम्मीदवार बनाया था और रंजीत राणा करीब 400 से कम वोटों से चुनाव हारे थे। इस रंजीत राणा भी प्रेम कुमार धूमल का आर्शीवाद लेकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे हैं। इसी तरह की बगावत खुलकर और परदे के पीछे बड़सर, कुटलैहड़, गगरेट और लाहौल स्पीति में भी सामने आ रही है। कुटलैहड़ में भाजपा ने पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर को किनारे कर कांग्रेस के बागी देवेंद्र भुट्टो को उम्मीदवार बनाया है। कुटलैहड़ में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र भुट्टो के स्वागत कार्यक्रम में वीरेंद्र कंवर शामिल नहीं हुए और दूरी बनाए रखे। जिससे कंवर की नाराजगी साफ जाहिर हो रही है।
सियासत की बड़ी बात यह है कि कांग्रेस से बगावत करने वाले 6 में से 4 विधायक पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के पुत्र और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के संसदीय क्षेत्र से हैं। कांग्रेस के सभी बागियों को अपने विधानसभा क्षेत्र में स्वागत कराने के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पार्टी अध्यक्ष राजीव बिंदल तो शामिल हुए लेकिन अभी तक धूमल और अनुराग ठाकुर किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। जयराम ठाकुर सभी बागियों को लेकर धूमल के पास अवश्य गए लेकिन अभी तक धूमल ने इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है। सियासत में किसी बारे में न बोलना भी बहुत बड़ा संदेश होता है, शायद अभी तक इस संदेश को धूमल और अनुराग समर्थक समझ रहे हैं। अब आगे देखना है कि भाजपा बगावत को रोकने में कितनी कामयाब होती है।
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