योजनाओं के प्रति जागरूकता और शिविर लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट रखा
चंडीगढ़, 7 फरवरी:
पंजाब में श्रमिकों की भलाई के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई के लिए दी जाने वाली वजीफा योजना के लिए श्रमिक की दो साल की सेवा की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड की वजीफा योजना श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए दी जाती है, जिसके लिए पहले श्रमिक की कम से कम दो साल की सेवा अनिवार्य थी। बीती शाम, लेबर भवन में आयोजित पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड की 55वीं बैठक में श्रम मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने इस शर्त को समाप्त करने का निर्णय लिया।
तरुनप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि अब श्रमिकों को वजीफा योजना का लाभ अंशदान करने की तिथि से ही मिल सकेगा। सौंद की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्रमिकों की भलाई के लिए कई और महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड की योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक करोड़ रुपए का वार्षिक बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, इन योजनाओं का लाभ देने के लिए श्रमिकों के कार्यस्थल पर शिविर लगाने हेतु भी एक करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया।
सौंद ने बताया कि बोर्ड के तहत दी जाने वाली शगुन योजना का लाभ लेने के लिए अब रजिस्टर्ड मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। अब श्रमिक धार्मिक स्थल पर करवाई गई शादी और विवाह संपन्न कराने वाले धार्मिक व्यक्ति की तस्वीरें संलग्न कर शगुन योजना का लाभ ले सकता है। इस फैसले से श्रमिकों को रजिस्टर्ड मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त करने में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी।
श्रम मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इसके अलावा, यह भी निर्णय लिया गया कि बोर्ड के फंड में अंशदान की राशि को 1 अप्रैल 2025 से बढ़ाया जाएगा, ताकि पंजाब लेबर वेलफेयर बोर्ड की आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सके।
इस बैठक में श्रम सचिव मनवेश सिंह सिद्धू, श्रम आयुक्त राजीव कुमार गुप्ता, जॉइंट डायरेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज़ नरिंदर सिंह, सहायक वेलफेयर आयुक्त गौरव पुरी, जॉइंट डायरेक्टर कन्नू थिंद और उद्योग, वित्त व सामाजिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
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