सब हैड : 2 वर्ष के दौरान कुल 28661 युवाओं को सरकारी रोजगार मिला, अनुबंध पर 17390 व आउटसोर्स पर 7747 भर्ती
शिमला. प्रदेश में बेरोजगारी की समस्या विकराल रुप धारण करती जा रही है। सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की, बेरोजगारी विपक्षी दल का सरकार के खिलाफ प्रमुख मुद्दा रहती है। विपक्ष में रहकर बेरोजगारों को रोजगार देने का वायदा करने वाली राजनैतिक पार्टिया जब सत्ता की कुर्सी में विराजमान हो जाती हैं तो फिर सत्ता की कुर्सी से बेरोजगारी की बात करना भी उचित नहीं समझतीं। वर्तमान में भाजपा नेता सत्ता की कुर्सी पर हैं तो कांग्रेसी विपक्ष की भूमिका निभाते हुए बेरोजगारी को मुद्दा बना रही है। विधानसभा से लेकर सड़क तक कांग्रेस बेरोजगारी का मुद्दा उठा रही है। विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि 31 जनवरी 2020 तक प्रदेश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 8.46, 209 है। गत दो वर्षो के दौरान सरकार ने 28661 लोगों को सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त हुआ है। जिसमें 3109 को नियमित नौकरी दी गई है जबकि 17390 अनुबंध, 415 दैनिक भोगा और 7747 आउटसोर्स के आधार पर भर्ती किए गए हैं।
सरकार ने बताया कि रोजगार कार्यालय में पंजीकृत 8 लाख 46 हजार बेरोजगारों में से पोस्ट ग्रेजुएट 76318, ग्रेजुएट 1,36,517, बारहवीं पास 404819, दसवीं पास 195548 और अंडर दसवीं 33007 हैं। सरकार के द्वारा दिए गए रोजगार में सबसे अधिक प्राथमिक शिक्षा विभाग में ही अनुबंध और पार्टटाइम के रुप में नौकरी दी गई है। इस विभाग में 6165 अनुबंध पर और 947 पार्ट टाइम के रुप में नौकरी दी गई है। यानि सरकार ने जो बताया है कि 28661 लोगों को रोजगार दिया गया है, उसमें भी अंशकालीन नौकरी की संख्या भी शामिल है। सरकार के इन आंकड़ों से लगता है कि अब सरकारी क्षेत्र में नियमित नौकरी के अवसर खत्म होते जा रहे हैं। अनुबंध, आउटसोर्स के साथ अंशकालीन नौकरी ही मिल रही है। सरकार ने अनुबंध पर रखे गए कर्मचारियों के लिए पॉलिसी तय की है कि कहीं तीन साल में तो कहीं पांच साल का अनुबंध पूरा करने वालों को रेगुलर किया जाएगा। लेकिन अनुबंध के पांच साल पूरा कर चुके हजारों लोगों को नियमित नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे यह कारण होता है कि अभी उनके लिए नियमित की पोस्ट खाली नहीं हे। इसके साथ ही आउटसोर्स और अंशकालीन के रुप में नौकरी करने वालों को लिए कोई पॉलिसी ही नहीं बनी हैं कि इन्हें कब रेगुलर किया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठ लाख से अधिक बेरोजगारों में से 3 हजार को ही नियमित नौकरी मिली है तो तय है कि अब यह बेरोजगारी का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जाएगा और बेरोजगारी की समस्या विकराल रुप धारण करती जाएगी। सब जानते हैं कि प्रदेश के स्कूल, कालेजों और यूनिवर्सिटी से प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में छात्र पास होकर निकलते हैं। प्रदेश में 5 सरकारी यूनिवर्सिटी, एक दर्जन से अधिक प्राइवेट यूनिवर्सिटी, सैकड़ों इंजीनियरिंग, पॉलिटैक्निक, नर्सिंग, बीएड कॉलेजों से भी हजारों छात्र फाइनल की परीक्षा पास कर निकल रहे हैं। इनमें से कितनों को रोजगार मिल रहा है और कितने बेरोजगार होकर रोजगार पाने की लाइन में लग रहे हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकारी की तरफ से समय –समय पर यह संकेत दिए जाते हैं कि युवा सरकारी नौकरी की ओर न भागें। वह सरकारी स्कीमों का लाभ लेकर स्वरोजगार स्थापित करें। स्वरोजगार के माध्यम से खुद भी रोजगार हासिल करें और दूसरों को भी रोजगार दें। इसके साथ सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश के माध्यम से उद्योगों की स्थापना का प्रयास भी करती हैं, जिससे उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले। लेकिन फिर भी यह सब प्रयास बढ़ती बेरोजगारी के सामने बौने साबित हो रहे हैं और बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है।
सुनील शर्मा बिट्टू : सत्ता की कुर्सी से विधानसभा पहुंचने की रणनीति
मुख्यमंत्री ने स्टेट अलाइड एंड हेल्थ केयर कांऊसिल की वेबसाइट का शुभारम्भ किया
HP SET EXAM 2026 apply, through “Online” mode only
HP SET GEOGRAPHY PAPER 3, 2015
HP PSC HP SET GEOGRAPHY PAPER 2, 2015
HP PSC HP SET ENGLISH PAPER 3, 2015
STATE ELIGIBILITY TEST-2026