कहा, आज़ादी से पहले और बाद के समय देश को अनाज उत्पादन में आत्म निर्भर बनाने और बेमिसाल कुर्बानियों के महत्वपूर्ण योगदान के कारण पंजाब विशेष सम्मान का हकदार
प्रदेश के विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्त कमीशन से 1 32, 247 करोड़ रुपए के फंड्स की मांग
किसानों को मौजूदा संकट में से निकालने के लिए फ़सली विभिन्नता को बड़ा प्रोत्साहन देने की वकालत की
चंडीगढ़, 22 जुलाई-
वित्तीय सूझ-बूझ और तथ्यों पर आधारित मज़बूत केस पेश करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य के दौरे पर आई 16वें वित्त कमीशन की टीम से प्रदेश के सर्वपक्षीय विकास के लिए विशेष पैकेज की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कमीशन के चेयरमैन डा. अरविन्द पनगड़िया, मैंबर अजय नारायण झा, ऐनी जॉर्ज मैथ्यू, डा. मनोज पांडा और डा. सौम्याकांती घोष के अलावा कमीशन के सचिव ऋत्विक पांडे का स्नेहपूर्ण स्वागत किया।
इस मौके मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को अनाज पक्ष से आत्मनिर्भर बनाने में पंजाब के कीमती योगदान के कारण पैदावार, प्राप्ति और आज़ादी की रक्षा के लिए सूबे को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाबियों ने पहले ही दुनिया भर के हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली है और यह पैकेज प्रदेश के आर्थिक विकास को और मजबूती देगा। भगवंत सिंह मान ने उम्मीद जताई कि वित्त कमीशन राज्य सरकार की मांगों की तरफ हमदर्दी के साथ विचार करेगा और पंजाब को खुले दिल के साथ फंड्स अलाट करेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास को बढ़ावा देने के लिए वित्त कमीशन से 1,32, 247 करोड़ रुपए के फंड्स देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन फंड्स में 75, 000 करोड़ रुपए के विकास फंड, कृषि और फ़सली विभिन्नता के लिए 17,950 करोड़ रुपए, पराली प्रबंधन और परिवर्तनीे प्रबंधों के लिए 5025 करोड़ रुपए, नार्को-आतंकवाद और नशों की बुराई से निपटने के लिए 8846 करोड़ रुपए के अलावा उद्योग को पुर्नजीवित करन के लिए 6000 करोड़ रुपए शामिल हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि 9426 करोड़ रुपए के फंड शहरी स्थानीय इकाईयों के लिए और 10, 000 करोड़ रुपए के फंड्स ग्रामीण स्थानीय इकाईयों के लिए देने की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री ने कमीशन का महान गुरूओं, संतों, पीरों और शहीदों की पवित्र धरती पर पर पहुंचने के लिए स्नेहपूर्ण स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पंजाब को देश के अन्न भंडारण के तौर पर जाना जाता है क्योंकि राज्य के मेहनती किसानों ने देश को अनाज उत्पादन में आत्म निर्भर बनाने में बेमिसाल योगदान दिया है। इसी तरह भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश की खड़गभुजा होने के नाते सूबे ने देश के आज़ादी आंदोलन दौरान सब से अधिक कुर्बानियां दीं हैं और अब आज़ादी के बाद भी देश की एकता, अखंडता और प्रभुसत्ता की चौकीदारी के लिए डटकर पहरा दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने पंजाब में कुशल, पारदर्शी शासन और मज़बूत आर्थिक विकास लाने के उदेश्य के साथ गहरे सुधारों के सफ़र की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि हमने अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत से जन-हितैषी सुधार किये हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर स्थिरता और स्व-निर्भरता के लिए स्रोतों को जुटाने के लिए पंजाब अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सिर्फ़ पिछले दो सालों में राज्य ने अपने टैक्स राजस्व के प्रमुख वर्गों में राष्ट्रीय विकास दर को पछाड़ते हुए प्रभावशाली विस्तार दर्ज किया है। उन कहा कि जी. एस. टी. राजस्व 33 प्रतिशत बढ़ा है और अकेले आबकारी में 50 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। यह मज़बूत प्रशासन और इमानदार शासन के साथ संभव हुआ है जो कि सरकार ने पहले दिन से प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अलग-अलग खर्चों की भी समीक्षा कर रही है और ग़ैर-उत्पादक खर्चों को तर्कसंगत बनाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के द्वारा हम लम्बे समय के लिए बिजली सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने और हमारे बिजली ढांचे की भरोसे योग्यता को बेहतर बनाने का इरादा रखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की समस्याएं नई नहीं हैं और यह हमें विरासत में मिलीं हैं। इनमें से बहुत सी समस्याएं मतदान के दिनों से ठीक पहले पिछली सरकारों के गलत राजनैतिक फ़ैसलों कारण पैदा हुई हैं। चाहे मार्च, 2017 में लिया गया सी. सी. एल. का 30, 584 करोड़ रुपए का कर्ज़ हो या 2021 की मतदान से ठीक पहले दीं गई बड़ी-बड़ी अनावश्यक सबसिडियां हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कदमों के बुरे नतीजे आज भी महसूस किये जा रहे हैं क्योंकि हम विरासत में मिलीं इन चुनौतियों के बीच वित्तीय मज़बूती हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार’ रंगला पंजाब’ सृजन करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है जिस के लिए प्रदेश के लोगों का सहयोग ज़रूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत में मिलीं समस्याओं के इलावा राज्य को कई ऐसीं विलक्षण चुणौतियें दरपेश हैं, जिन का इस समय पर कोई और राज्य सामना नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरहदी सूबा होने के नाते नार्को-आतंकवाद और सरहद पार की गतिविधियों का सामना कर रहा है, जिस कारण बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की भरती की जाती है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब पुलिस 500 किलोमीटर से अधिक आंतरराष्ट्रीय सरहद पर तैनाती के द्वारा देश की एकता और अखंडता की रक्षा कर रही है।
मुख्यमंत्री ने वित्त कमीशन को राज्य की पुलिस फोर्स के आधुनिकीकरन के लिए बड़े स्तर पर फंड्स अलाट करने की अपील की जिससे राष्ट्रीय फर्ज को कुशलता के साथ निभाया जा सके। उनहोंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने प्रदेश में अपनी किस्म की पहली सड़क सुरक्षा फोर्स ( एस. एस. एफ.) कायम करन की पहलकदमी की है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस फोर्स ने फरवरी 2024 में अपनी शुरुआत के बाद एक हज़ार से अधिक कीमती जानें बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबो के मेहनती किसानों ने उपजाऊ मिट्टी और पानी जैसे बहुमूल्य कुदरती स्रोतों की अधिक से अधिक प्रयोग कर देश के लिए अनाज पैदा किया है। उन्होंने कहा कि भूजल की बात करें तो राज्य के लगभग सभी ब्लाक ब्लैक ज़ोन में चले गए हैं, जिस कारण पंजाब का पानी तेज़ी के साथ ख़त्म हो रहा है। तेज़ी के साथ घट रहे पानी के स्तर के बाद पैदा हो रही स्थिति पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दुख की बात है कि दुबई और अन्य खाड़ी देशों में तेल निकालने के लिए इस्तेमाल की जातीं उच्च शक्ति वाली मोटरों की पंजाब में पानी निकालने के लिए प्रयोग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का पानी बचाने का एक ही-एक रास्ता फ़सली विभिन्नता को उत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि यह बहुत सम्मान एंव संतोष वाली बात है कि भारत सरकार ने हाल ही में राज्य सरकार द्वारा खेती विभिन्नता को उत्साहित करने के लिए 17, 500 रुपए प्रति हेक्टेयर रियायत के प्रस्ताव को मंजूर किया है। यह फ़सली चक्कर को तोड़ने में अहम कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी ने देश में हरित क्रांति का नेतृत्व किया और अब इस यूनिवर्सिटी का नेतृत्व विश्व प्रसिद्ध टिशू कल्चर विशेषज्ञ कर रहे है, जो फ़सली विभिन्नता को उत्साहित करने में बड़ी भूमिका निभा सकते है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि भूजल बचाने के लिए राज्य सरकार नहरी पानी के प्रयोग को उत्साहित करने को यकीनी बना रही है और पहले 30 प्रतिशत के मुकाबले पंजाब अब सिंचाई के लिए 70 प्रतिशत नहरी पानी इस्तेमाल कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे एक तरफ़ भूजल की बचत होगी और दूसरी तरफ़ बिजली बचेगी, जिससे सरकारी खजाने से बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील जैसी बड़ी औद्योगिक कंपनियां राज्य सरकार की निवेश हितैषी नीतियों कारण पंजाब में निवेश करने के लिए तैयार है। भगवंत सिंह मान ने अफ़सोस व्यक्त किया कि पड़ोसी राज्य में टैक्स रियायतों कारण पंजाब के औद्योगिक विकास में रुकावट आ रही है, इस कारण औद्योगिक इकाईयां इन राज्य में तबदील हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बहुत से नए विचार पेश किए है, जिनमें अलग-अलग रंगों वाले स्टैंप पेपर शामिल है, जो राज्य में औद्योगिक क्रांति के नए युग की शुरुआत करने की तरफ बड़ा कदम है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ऐसा पहला राज्य है, जिसने उद्दमियों को अपने यूनिट स्थापित करने के लिए हरे रंग के स्टैंप पेपर जारी किए है, जिससे राज्य के औद्योगिक विकास को अपेक्षित बढावा मिलेगा। उन्होंने इसे क्रांतिकारी कदम बताया, जिसका उदेश्य राज्य में अपनी इकाईयां स्थापित करने के इच्छुक उद्दमियों के लिए कारोबार के लिए माहौल सुखदाई बनाना है।
मुख्यमंत्री ने वित्त कमिशन को पंजाब के सामने विलक्षण चुणौतियों को पहचानने और राज्य को इन रुकावटों को पार करने के योग्य बनाने के लिए अपेक्षित सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कमिशन की मदद हमारे राज्य के वित्त में महत्वपूर्ण सुधार करने और सभी के लिए टिकाऊ विकास और खुशहाली की तरफ अपनी यात्रा जारी रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। भगवंत सिंह मान ने ज़ोर देकर कहा कि हालात चाहे जैसे भी हो पंजाब हमेशा डट कर खड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुसीबतों का सामना करते हुए पंजाब हमेशा पहले की अपेक्षा और मज़बूत होकर उभरा है और हम इस शानदार परंपरा को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि कमिशन के सहयोग और मार्ग दर्शन के साथ राज्य सरकार पंजाब की आर्थिकता को ज्यादा मज़बूत एंव समर्थय बनाएगी। भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि पंजाब सरकार राज्य की पुरातन शान बहाल करने के लिए वचनबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कमी बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।
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