टोक्यों ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद पदक जीता है। टीम की इस ऐतिहासिक जीत के साथ देश में एक नये अध्याय की शुरुआत देखने को मिली है। केंद्र सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद के नाम पर करने का निर्णय लिया है। केंद्र का यह निर्णय एक दिन की बड़ी हेडलाइन बनने के लिए है या फिर खेल के प्रति उनकी नीति का प्रारंभिक चरण है। यह तो आने वाले समय ही पता चलेगा। हालांकि खिलाड़ियों के स्थान पर नेताओं के नाम पर खेल स्टेडियम का नामकरण भाजपा सरकार के समय हो रहा है। अहमदाबाद के क्रिकेट खेल स्टेडियम का नाम नरेंद्र मोदी स्टेडियम रखा गया तो दिल्ली में अरुण जेटली के नाम पर स्टेडियम का नाम रखा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी बाजपेई सहित अन्य नेताओं के नाम पर खेल संस्थानों के साथ अन्य संस्थानों के नाम पूरे देश में हैं। केंद्र सरकार के द्वारा राजीव गांधी खेल रत्न आवार्ड का नाम ध्यानचंद के नाम पर करने से देश व्यापी चर्चा भी छिड़ गई है। चर्चा यह भी हो रही है कि सरकार का यह सराहनीय कदम हैं। ध्यानचंद को भारत रत्न आवार्ड दिए जाने की मांग भी वर्षों से चल रही है लेकिन किसी भी सरकार ने नहीं दिया। खिलाड़ी के नाम पर आवार्ड का नाम रखे जाने के साथ अब सरकार को यह नियम भी बना देना चाहिए कि खेल संघों में नेताओं की जगह नहीं होगी। जो खिलाड़ी कम से कम नेशनल स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया होगा, वही खेल संघों का पदाधिकारी हो सकता है। खेलों के राष्ट्रीय संगठन के लिए नेशनल खिलाड़ी तो प्रदेश स्तर के संगठन के लिए प्रदेश स्तरीय खिलाड़ी ही पदाधिकारी होने के पात्र होंगे तो एक नई शुरुआत होगी। जब खेल संघों के कमान खिलाड़ियों के हाथों में होगी तो वह ही यह बेहतर तरीके से निर्धारित कर सकेंगे कि खेलों को विकसित करने के लिए किन सुविधाओं की आवश्यकता है। खिलाड़ियों के लिए कैसा मैदान चाहिए, कौन से उपकरण की जरुरत है, कौन बेहतर कोच हो सकता है, कौन खिलाड़ी किस भूमिका में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और इसके लिए बजट का क्या प्रावधान होना चाहिए। जब खेलों के लिए बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी तो तय है कि खेलों को विकास होगा। खेल संघों की ओर से बेहतर प्लॉनिंग सरकार के समक्ष पहुंचेगी तो सरकार भी उनको सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी। वर्तमान में देखा जाता है कि राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के खेल संघों के अध्यक्ष पद पर नेता विराजमान हैं। बात हिमाचल प्रदेश की हो तो यहां भी वही हाल है। अभी हॉल में एक समाचार सामने आया कि बिजली मंत्री सुखराम चौधरी को हॉकी एसोसिएशन की कमान सौंपी गई है। सवाल यह है कि सुखराम चौधरी ने कब हॉकी खेल, हॉकी खेल के बारे में क्या ज्ञान है, हॉकी में कितने खिलाड़ी खेलते हैं, मैदान का साइज क्या होता है, किन सुविधाओं की आवश्यकता है, यह सब एक नेता को पता नहीं होता। खेल की और भी बारीकियां होती हैं जो नेता को नहीं पता होती, वह सिर्फ एक खिलाड़ी ही जान सकता है। हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी खेल संघों की कमान नेताओं के हाथों में है और यह हाल राष्ट्रीय स्तर पर है। सरकार में खेलों के संबंध में नीति निर्धारण करने से लेकर बजट उपलब्ध कराने के लिए खेल मंत्री होता ही है तो फिर खेल संघों में नेताओं की जरुरत क्या है। सरकार को ऐसा नियम ही बना देना चाहिए कि राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश स्तर पर सरकार से मान्यता प्राप्त खेल संघों में खिलाड़ी ही पदाधिकारी बन सकेंगे। जिससे कि खेलों का बुनियादी ढांचा विकसित हो सके और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलें, जिससे वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
Trade deal with United States is pact that will ruin farmers of Punjab & country: CM Bhagwant Singh Mann*
Punjab Vidhan Sabha passes resolution heavily castigating Sukhpal Singh Khaira for making derogatory remarks on Women availing Rs. 1000 assistance
We’ve fulfilled every promise made to people of Punjab & remain committed to fulfilling every assurance in future as well: CM Bhagwant Singh Mann*
Proposed India–US trade deal could cripple Punjab’s farm economy & hurt rural livelihoods: Laljit Singh Bhullar*
CM Bhagwant Singh Mann interacts with students at School of Eminence in Adampur; Schools
Harjot Singh Bains Tears Into Sukhpal Khaira for Derogatory Remark Against FM Cheema*